मुसलमानों की अच्छाइयों को कोई बताने के लिए तैयार नहीं: पंडित यगुल शास्त्री

मुसलमानों की अच्छाइयों को कोई बताने के लिए तैयार नहीं: पंडित यगुल शास्त्री

दिल्ली।  इस्लाम धर्म में शांति,सआदत और दीने उल्फत व मुहब्बत भरी है। यह मानवता को सम्मान आपसी मेलजोल और भाईचारे की शिक्षा देता है। सद्भावना और सांप्रदायिक सद्भाव की भावना की आबियारी करता है। उसकी निगाह में सबसे अच्छा मुसलमान वो है जो मानवता के कल्याण और अधिकारों की रक्षा के लिए जीता मरता है। इन विचारों को मौलाना असगर अली इमाम महदी सल्फ़ी नाज़िम ओमूमि मर्कज़ी जमीअत अहले हदीस ने जमीयत अहले हदीस ने वियक्त किया। महोदय केंद्रीय जमीयत अहले हदीस हिंद द्वारा आयोजित “सद्भावना और सांप्रदायिक सद्भाव -महत्व और जरूरत” दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि दुनिया में अल्लाह तआला के अनगिनत जीव हैं जिनमें मनुष्य बेस्ट प्राणी है। लेकिन मनुष्यों में भी मुसलमानों को सबसे बेहतर इंसान करार दिया गया है क्योंकि वे बिना किसी भीड़ भाव के रंग नसल और क़ौम व मिल्लत और देश व समाज,सारी मानवता का भला चाहते हैं और लाभ पहुंचाने के लिए पैदा किए गए हैं।

इस औसर पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए हिन्दू धर्म के प्रमुख पंडित,हिंदी पत्रिका अयोध्या के संपादक युगल किशोर शास्त्री ने सद्भावना और सांप्रदायिक सद्भाव के शीर्षक के तहत संगोष्ठी आयोजित करने पर केंद्रीय जमीयत अहले हदीस हिंद के मौलाना असगर अली इमाम मेहदी को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे गंदे वातावरण में जब देश का माहौल ख़राब करने की भरपूर कोशिश की जा रही है हमें अत्यंत एकाग्रता के साथ इस तरह के कार्यक्रम करते रहने की ज़रूरत है।

हिंदू धरम के पंडित ने कहा कि न्यायपालिका,मीडिया और अन्य सभी अन्य विभागों में सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व आवश्यक है। यह न्याय की स्थापना के लिए भी आवश्यक है। उन्हों ने कहा की आखिर क्या बात है कि संसद पर हमला वाले मुकदमे में इतना जल्दी फैसला आ जाता है और बाबरी मस्जिद के विध्वंस में शामिल लोग पूरी स्वतंत्रता से दनदनाते घूम फिर रहे हैं? आखिर क्या वजह है कि समय समय पर दलितों पर हमले होते आ रहे हैं? तथ्य यह है कि न्यायपालिका के निर्णय को भी प्रभावित किए जा रहे हैं। इसलिए हम पूरी तरह से इस अभियान को चलाना चाहते हैं। न्यायपालिका में भी सभी धर्मों की बराबर प्रतिनिधित्व होना चाहए।

यगुल किशोर ने कहा की मीडिया की भूमिका भी किसी से ढका छिपा नहीं है। वह कुछ लोगों के हाथों का खिलौना बनकर रह गया। अगर एक मुस्लिम किसी जुर्म में पकड़ा जाता है तो सभी मीडिया वाले आसमान सिर पर उठालेते हैं,लेकिन मुसलमानों की अच्छाइयों को कोई बताने के लिए तैयार नहीं है।

ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस मशवरत के अध्यक्ष डॉ। ज़फरुल इस्लाम खान ने कहा कि सभी मानते हैं की जमीयत अहले हदीस हिंद सबसे कट्टर तंज़ीम है और कहा जाता है कि ये लोग विश्वास के अध्याय में कठोर होते हैं, कभी भी समझौता नहीं कर सकते इसके बावजूद आप देख रहे हैं कि वे इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने में आगे हैं और मस्जिद के एक हिस्से में आयोजित कर रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरी दुनिया में इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ जो प्रचार प्रसार करने की कोशिश की जाती है उसकी कोई सच्चाई नहीं है।

डॉक्टर साहब ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि भारत देश में एक लंबी अवधि से हम सभी धर्म के लोग मिलजुल कर रहे हैं। क्या कारण है कि पिछले पंद्रह बीस वर्षों से इस तरह का माहौल पैदा हो गया हे।
जमात इस्लामी हिन्दके सचिव मोहम्मद अहमद ने कहा कि आज जबकि कुछ लोग राजनीतिक उद्देश्यों के मद्देनजर नफरत फैलाने की राजनीति कर रहे हैं, ऐसे समय में शांति से काम करने वालों को हार्दिक बधाई।

संगोष्ठी की अध्यक्षता मौलाना जमील अहमद मदनी मुफ्ती जमीयत अहले हदीस हिन्द ने निभाया। इस अवसर पर जामिया इस्लामिया सनबिल के प्रतिनिधि मौलाना यार मोहम्मद सल्फ़ी, मौलाना मोहम्मद अजहर मदनी, डॉक्टर नईम हसन, कवि मुज़म्मिल फैजाबादी, मौलाना फजलुर्रहमान मदनी, मौलाना इरफान शाकिर रियाज़ी, मौलाना अब्दुश्शकूर सल्फ़ी, मौलाना रिजवान अल्लाह रियाज़ी और डॉक्टर नसीम अहमद नसीम ने भी अपने विचार व्यक्त किये और सद्भावना और राष्ट्रीय एकता के शीर्षक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने पर केंद्रीय जमीयत अहले हदीस हिंद के मौलाना असगर अली इमाम महदी को मुबारकबाद पेश किया और उसे समय की बड़ी जरूरत बताया। आकाश वाणी गोरखपुर के पंडित राम प्रसाद ने मनज़ूम कलाम पेश किया।
बशुक्रिया -सदा ए भारत 

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