UP में बेहतर व्यवस्था के लिए मुस्लिम युवा भी आयें पुलिस महकमे में : DG जावीद अहमद

UP में बेहतर व्यवस्था के लिए मुस्लिम युवा भी आयें पुलिस महकमे में : DG जावीद अहमद

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने चुनौतीपूर्ण दौर में एक ऐसे अधिकारी को राज्य के पुलिस की कमान दी है जो बेहद पढ़े लिखे और कार्यकुशल हैं और अपनी निष्पक्षता के लिये मशहूर हैं। जब समाजवादी पार्टी की सरकार अपनी खराब कानून और व्यवस्था की छवि से जूझ रही हो और राम मंदिर आंदोलन की साम्प्रदायिक चुनौतियां सामने मुंह बाये खड़ी हों तब सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह की सहमति से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मेरिट के आधार पर एस जावीद अहमद जैसे अल्पसंख्यक समुदाय के एक अधिकारी को प्रदेश की कानून व्यवस्था की बागडोर देकर एक साहसिक और सूझबूझ वाला निर्णय लिया है। उनसे इंडिया संवाद के कार्यकारी संपादक अरुण कुमार त्रिपाठी ने प्रदेश के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर लंबी बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके अंश-

सवाल-  22 करोड़ की आवादी वाले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश जोकि अपने में योरोप के फ्रांस, जर्मन और ग्रेट ब्रिटेन जैसे देशों के समान है, उसकी कानून और व्यवस्था को संभालतेहुए आप अपने सामने कितनी बड़ी चुनौती देख रहे हैं?

उत्तर-  देखिये, 22 करोड़ लोग किसी एक मुददे पर एक साथ आंदोलित नहीं होते। गोरखपुर वाला व्यक्ति मुजफफरनगर वाले व्यक्ति की तरह नहीं सोचता। उनकी समस्यायें और उनकी सोच अलग-अलग होती हैं। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश काडर के अफसरों में बहुविधि क्षमता वाली प्रतिभायें हैं। कुछ अधिकारी अगर पूर्वांचल पर पकड़ रखते हैं तो कुछ पश्चिम उत्तर प्रदेश के विशेषज्ञ हैं। अगर कुछ अफसर अवध को अच्छी तरह से जानते हैं तो कुछ बुंदेलखण्ड के मास्टर हैं।  इसके अलावा उत्तर प्रदेश काडर में ऊपर के लेवल पर अच्छे अफसरों की लंबी परंपरा है। इसलिये प्रदेश को नियंत्रित करने में मै कोई बड़ी चुनौती नहीं देखता।


प्रश्न- राजनीतिक रूप से जो लोग प्रदेश को बांटने की बात करते हैं वे कानून और व्यवस्था के मुद्दे को एक बड़ी समस्या के रूप में प्रस्तुत करते हैं, क्या आप को नहीं लगता कि इतने बड़े प्रदेश की कानून व्यवस्था को संभालना कठिन है इसलिये इसे बांट देना चाहिए।


 उत्तर- मुझे नहीं लगता कि एक महत्वपूर्ण प्रदेश को बांटने के लिये अकेली यह कोई पर्याप्त वजह हो सकती है।

प्रश्न-  प्रदेश में जातिगत और साम्प्रदायिक अपराधों का अपना इतिहास है एक तरफ प्रदेश में वर्ण व्यवस्था मौजूद है तो दूसरी तरफ साम्प्रदायिक विवादों की तमाम वजहे हैं। पिछले ढाई दशकों से प्रदेश में दोनों तरह के अपराध तीव्र हुये हैं। उन्हें नियंत्रित करने के लिये सैद्घांतिक और व्यावहारिक स्तर पर आप क्या रणनीति सोचते हैं?

उत्तर-   समाज में जाति का बढ़ता संघर्ष एक समाजशास्त्री के रूप में हमे रोचक लगता है। क्योंकि मेरा मानना है कि समाज में मंथन हो रहा है और जाति -व्यवस्था को चुनौती मिल रही है लेकिन एक पुलिस अफसर के रूप में यह बात हमें परेशान करती है। इसीलिये हमने अधिकारियों की बैैठक में यह बात कही कि हमारे सामने सवाल है कि पुलिस शांति बनाये या कानून का राज कायम करे। जरूरी है कि पुलिस कानून का राज कायम करे। अगर कानून का राज होगा तो पुलिस उस पर कार्रवाई करेगी जिसने कानून के खिलाफ काम किया है। इसलिये हमने कहा है कि अधिकारी शांति व्यवस्था बहाल करने के बजाय कानून का राज कायम करें, वो ज्यादा असरदार होगा। इससे सामाजिक मंथन में मदद मिलेगी।


प्रश्न-  पुलिस विभाग पर जातिगत पूर्वाग्रह का आरोप लगाया जाता है। सत्ता में जो पार्टी आती है उसकी अपनी जातीय संरचना होती है और उसमें खास तरह की जतियों का प्रभुत्व होता है। वह असर पुलिस प्रशासन में दिखाई पड़ता है। तमाम थानों के इंचार्ज और उस जाति के लोग होते हैं जिनका सत्ताधारी दल में वर्चस्व होता है। वे अपनी जाति  का पक्ष लेते हैं और दूसरी जातियों को परेशान करते हैं।  यह शिकायत पूरे प्रदेश में आम है। ऐसे में आप कानून का राज या निष्पक्ष प्रशासन कैसे कायम करेंगे? 

उत्तर- आदर्श स्थिति में ऐसा नहीं होना चाहिए। लेकिन हिंंदुस्तान की राजनीति इस समय जिस तरह के संक्रमण कालीन दौर से गुजर रही है उसमें यह सब होना स्वाभाविक है। एक तबका अंगड़ाई लेकर सामने आ रहा है। मध्य वर्ग के उदार विचार के लोग इस बात को नहीं मानेंगे। जिनके हाथों से सैकड़ों साल की सत्ता छूट रही है उन्हें यह बात बुरी लगेगी और वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे। लेकिन यह आरोप जितना बताया जाता है उतना नहीं है। हर बिरादरी के लोग काम कर रहे हैं। एबीसी कोई भी हो किसी के साथ सबूत और कानून के लिहाज से कार्रवाई की जाती है।


प्रश्न- जस्टिस रंगनाथ मिश्र समिंति हो या राजिंदर सच्चर समिति की रपट हो या बीएन राय की कम्बैटिंग कम्युनल कान्फल्किट हो हर जगह यह बात आती है कि पुलिस विभाग में अल्पसंख्यकों के प्रति पूर्वाग्रह है। उत्तर प्रदेश के दंगे की रपटों में भी यह बात उभर कर आई है कि अगर पुलिस में अल्पसंख्यकों का समुचित प्रतिनिधित्व होता तो शायद अल्पसंख्यकों के प्रति अन्याय का आरोप न लगता। इस स्थिति में पुलिस में समुदायों के प्रतिनिधित्व की समस्या का हल कैसे करना चाहिए? 

उत्तर-  मुस्लिम समुदाय के लोगों को पुलिस में अधिक अधिक भरती होने की कोशिश करनी चाहिए। वे वैसा करते ही नहीं हैं। जब कोशिश ही नहीं की जाएगी तो संख्या कम रहेगी ही।


प्रश्न- क्या पुलिस में अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण होना चाहिए?

उत्तर- इस बारे में मेरे पास कोई साफ जवाब नहीं है।

प्रश्न-  प्रदेश में सपा सरकार के आते ही कई जगहों पर छोटे-मोटे दंगे हुए। उसके बाद मुजफ्फरनगर में बड़ा दंगा हुआ। आज भी राम मंदिर के नाम पर तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे समय में आप सांप्रदायिक तनाव से निपटने के लिए क्या तैयारी कर रहे हैं?

उत्तर-  सांप्रदायिक मामले पर हम लोग हमेशा तैयार हैं। वैसी ताकतों को पहचान रहे हैं और हर जिले के एसपी और कप्तान को उसके बारे में बता रहे हैं। कहा गया है कि ऐसी घटनाएं किसी भी कीमत पर न होने पाएँ?


प्रश्न- क्या सांप्रदायिक तनाव महज कानून और व्यवस्था की समस्या है? उसे तो सबसे पहले राजनीतिक तौर पर निपटना चाहिए।

उत्तर- हम पुलिस वाले तो कानून व्यवस्था के स्तर पर ही निपट सकते हैं।


प्रश्न- संगठित अपराधों को रोकने के बारे में क्या तैयारी कर रहे हैं?

उत्तर --संगठित अपराधों को रोकने में हम सफल हैं और यह कह सकते हैं कि इस बारे में उत्तर प्रदेश अच्छे नंबरों से पास हुआ है।

प्रश्न- आतंकवाद को रोकने के बारे में क्या कदम उठा रहे हैं? क्या उत्तर प्रदेश में आइएस या आइएम जैसे किसी संगठन की सक्रियता है? 

उत्तर -  देखिए हम किसी संगठन के बारे में तो कुछ नहीं कहेंगे । लेकिन हम ऐसी तैयारी कर रहे हैं कि यहां आतंकवाद के लिए वातावरण न बने। अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को तो हम नहीं रोक सकते लेकिन प्रदेश में ऐसा वातावरण नहीं बनने देंगे जिससे यहां उसे हवा मिले।

प्रश्न-  नागरिकों को क्या संदेश देना चाहते हैं आप? 

उत्तर-  उत्तर प्रदेश पुलिस अपने को नागरिकों के लिए अधिक संवेदनशील बनाने को तैयार है। वह कोशिश कर रही है कि नागरिक अधिकारों का अधिकतम ध्यान रखे।

प्रश्न-  महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पुलिस क्या कर रही है? क्या पुलिस में महिलाओं की संख्या बढ़ाई जा रही है?

उत्तर-  जेंडर मुद्दे के बारे में प्रत्येक पुलिस वाले को यह बात समझ में आनी चाहिए कि जो महिला घर से बाहर निकलती है उसकी सुरक्षा हमारा धर्म है। 

COMMENTS

loading...
loading...
Name

Agra Article Bareilly Current Affairs Exclusive Hadees Interview Jalsa Madarsa News muhammad-saw Muslim Story National Politics Ramadan Slider Trending Topic Urdu News Uttar Pradesh Uttrakhand World News
false
ltr
item
TIMES OF MUSLIM: UP में बेहतर व्यवस्था के लिए मुस्लिम युवा भी आयें पुलिस महकमे में : DG जावीद अहमद
UP में बेहतर व्यवस्था के लिए मुस्लिम युवा भी आयें पुलिस महकमे में : DG जावीद अहमद
UP में बेहतर व्यवस्था के लिए मुस्लिम युवा भी आयें पुलिस महकमे में : DG जावीद अहमद
http://2.bp.blogspot.com/-m0PSlihckKI/VpDhPic0uKI/AAAAAAAAUGw/ZtxT4makOH0/s640/Javid-Ahmdjavedahmad.JPG
http://2.bp.blogspot.com/-m0PSlihckKI/VpDhPic0uKI/AAAAAAAAUGw/ZtxT4makOH0/s72-c/Javid-Ahmdjavedahmad.JPG
TIMES OF MUSLIM
http://www.timesofmuslim.com/2016/01/up-dg-javid-ahmad.html
http://www.timesofmuslim.com/
http://www.timesofmuslim.com/
http://www.timesofmuslim.com/2016/01/up-dg-javid-ahmad.html
true
669698634209089970
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy