राजस्व के लालच में कही खो ना दें हम अपनी सम्पदा

किसी भी देश के लिए उस देश के मानव संसाधन ,प्राकृतिक संसाधन, सरकार की नीतियो के माध्यम से ही संभव होता है| विकास की अंधी दौड़ में जिस तरीके ...

किसी भी देश के लिए उस देश के मानव संसाधन ,प्राकृतिक संसाधन, सरकार की नीतियो के माध्यम से ही संभव होता है| विकास की अंधी दौड़ में जिस तरीके से हर देश में जल  जंगल ,ज़मीन ,पहाड़ियों और खेतों को खत्म करके कंक्रीट के इमारत बनाई जा रही है बिना पर्यावरण का ध्यान रखते हुए तो निश्चित ही विनाश होना है|

आप सभी को याद होगा देश के तमाम सम्मानित अखबारों में उत्तराखंड के पूरे के पूरे पेज के विज्ञापन अपने प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए दिए जाते रहे हैं |उस वक्त लोकस्वर संस्था ने इस बात को चेताया था उत्तराखंड में जिस तरीके से औद्योगिक करण हो रहा है निश्चित रूप से यह पर्यावरण के दृष्टिकोण से उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य को नुकसान पहुंचाएगा |यह बात हमने वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अपने पर्यावरण के अनुभवों के आधार पर कही थी परंतु सरकार आर्थिक लाभ के लिए उस बात को उसी तरह दरकीनर करती रही है जैसे अन्य राज्यों ने किया सरकार राजस्व के लालच में ही तो शराब के ऊँचे दाम में ठेके उठती है बाद उससे प्रताड़ित लोगों पर स्वस्थ के नाम पर पैसा खर्च करती है| हमें क्या मालूम था कि इस औद्योगिक करण का इतनी जल्दी प्रभाव पड़ जाएगा ।ढाई दशक में उत्तराखंड को अनेक प्राकृतिक आपदाओं को झेलना पड़ा है| इसी बात को मददे नजर रखते हुए 2020 जनवरी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के भवन की भूमि पूजन किया था और सीएम ने कहा था कि उत्तराखंड आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है|

इसलिए हमें हर वक्त सतर्क रहना होगा |एक अनुमान के मुताबिक अगर उत्तराखंड में बड़ा भूकंप आया तो राज्य में बड़े स्तर पर जन हानि के साथ 2480 करोड़ का नुकसान आवासीय भवनों को  सर्वाधिक क्षति होगी ।जिला चमोली उत्तराखंड में जिस तरीके से यह ग्लेशियर का टूटना किसी बड़ी आपदा आने की संभावना को बल देता है और तमाम मानव की बलि के साथ राज्य की और देश की संपदा को नुकसान जारी है |यह कितनी मानवों की और अन्य कितने तरीके के नुकसान का दंश देकर जाएगा यह देखने की बात है ।आज विश्व की पर्यावरण संस्थाएं और वैज्ञानिक पर्यावरण को बचाने के लिए प्रयासरत रहें समय-समय पर पूरे वर्ष कम से कम 2 दर्जन पर्यावरण को बचाने के लिए दिवस भी बनाते हैं फिर भी हम अपने स्वार्थ के लिए उन्हें दरकिनार करते हैं |आज हमें पशु, पक्षी ,जंगल, जमीन, नदियां, पेड़ पौधे ,वेटलैंड, फ़िल्टर पानी की बरबादी, आवाज का प्रदूषण, वाहन के प्रदूषण के साथ अनेक ऐसी चीजें हैं जिन्हें हमें बचाना होगा। लोक स्वर संस्था समय-समय पर पर्यावरण को लेकर अनेक कार्य करने के साथ प्रशासन और शासन को लिखती रही है परंतु आज उत्तराखंड के इस त्रासदी से लोकस्वर संस्था पुनः ना केवल भारत के देशवासियों से और सरकार से बल्कि पूरे विश्व से यह निवेदन करना चाहती है  आर्थिक विकास अगर जरूरी है या हमारी आवश्यकता है तो पर्यावरण की रक्षा करना हमारे स्वस्थ जीवन और सुरक्षित जीवन की पहली आवश्यकता है |किसी भी आदमी के जीवन स्वस्थ और सुरक्षित होने से बड़ा कोई भी ना तो काम है और ना ही विकास है| आज हम अपने इस लेख के माध्यम से देश दुनिया के तमाम सरकारों से मीडिया से और पर्यावरण के काम में लगी हुई संस्थाओं के साथ पर्यावरण प्रेमियों से आग्रह  करना चाहते हैं हमें अपने पर्यावरण बचाने के काम में और तेजी से मशक्कत करनी पड़ेगी तभी हम इस धरती को प्रलय से बचा पाएंगे |आज धरती पर प्रत्येक मानव का कर्तव्य व जिम्मेदारी है कि वह अपने गिलहरी प्रयास से पर्यावरण को सुरक्षित और सहेजने का काम करें |अब फेसबुक ,टि्वटर या ड्राइंग रूम में बैठकर मीटिंग में भाषण बाजी देने से काम नहीं चलेगा |आज की आवश्यकता है कि हम अपने अपने स्तर से पर्यावरण को बचाने के लिए काम करें चाहे सिग्नल ट्रैफिक पर 1 मिनट के लिए भी खड़ा होना पड़ता है तो एंजिन को हम बंद रखें या घर में अनावश्यक जलती हुई ट्यूब लाइट को बंद करना हो या पानी पीने के लिए जितनी प्यास की आवश्यकता है उतना ही लेने का प्रयास करें| चाहे आप का घर हो चाहे दूसरे का घर हो आदि अनेक कार्य हो सकते हैं तभी हम अपने को या आने वाले अपने भविष्य  की जनरेशन को एक स्वस्थ वातावरण दे पाएंगे अन्यथा ना दिन में चैन होगा ना रात में चैन होगा ।हमेशा डर की जिंदगी में जीते रहेंगे ।आज संस्था के सभी सदस्य स्वर्ग सिधारे हुए लोगों को अश्रुपूर्ण  श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और धरती पर रहने वाले सभी मानव जाति के लोगों को सद्बुद्धि प्रदान करें ताकि पर्यावरण को बचाने में हम सब का योगदान रहे।अतः हमें और सरकार को इस पर पुनः विचार करना होगा औधोगिक विकास के साथ हम प्राकृतिक आपदाओं से कैसे बचे ।आगरा की बेटी व उत्तराखंड की राज्यपाल  श्रीमती बेबी रानी मौर्य जी से जो पर्यावरण के प्रति बहुत ही संवेदनशील हैं लोगों को आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि वह उत्तराखंड को पर्यावरण के दृष्टिकोण से बचाने हेतु एक बड़ा कदम उठाएंगे।

राजीव गुप्ता जनस्नेही की कलम से    

Digital Varta News Agency

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